पंजाब

पंजाबी भोजन में ताज़े कृषि-उत्पादनों, दुग्ध उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली फसलों की प्रमुखता है, जो वृहत् और सूक्ष्म पोषक तत्वों से परिपूर्ण हैं। ग्रामीण पंजाब अभी भी खाना पकाने की पारंपरिक शैली का पालन करता है, जिसमें चूल्हा  और भट्ठी (चिनाई भट्ठी) सम्मिलित हैं। खाना पकाने की विभिन्न शैलियों में से एक में तंदूर (चिकनी मिट्टी की भट्ठी) का उपयोग किया जाता है जिसमें तंदूरी चिकन, तंदूरी पनीर आदि जैसे  प्रसिद्ध व्यंजन पकाये जाते हैं।

सुबह के नाश्ते में सामान्यतः, दूध के साथ दलिया, आलू पराठे के साथ लस्सी और मक्खन जैसे व्यंजन खाए जाते हैं। दोपहर के खाने के व्यंजनों में रोटी के साथ काले चने  और दही, राजमा मसाला, अमृतसरी कुल्चा, कढ़ी और तड़का दाल  सबसे अधिक प्रचलित हैं। रात के खाने में आमतौर पर चिकन, मछली और मेमने से बने माँसाहारी व्यंजन सम्मिलित होते हैं। चिकन टिक्का, बटर चिकन, अमृतसर मच्छी   सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में मिठाइयाँ मौसम के अनुसार बदलती हैं। गर्मियों में, खीर और फालूदा पसंद किए जाते हैं, जबकि सर्दियों में गाजर का हलवा और पंजीरी  का आस्वादन किया जाता है।

पंजाब में पेय पदार्थों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जो प्रमुख रूप से दुग्ध उत्पादों पर आधारित है। लस्सी  सबसे प्रसिद्ध गर्मी के पेय में से एक है, जो या तो नमकीन या मीठी होती है। पंजाब में भोजन का सेवन सामुदायिक है।

सरसों का साग और मक्की की रोटी :

सरहों दा साग  (सरसों का साग) एक लोकप्रिय शीतकालीन व्यंजन है। आमतौर पर इसका सेवन मक्की की रोटी, गुड़, बिना पके सफ़ेद मक्खन और नमकीन लस्सी के साथ किया जाता है। फसल की कटाई के मौसम के दौरान सरसों के खेत सरसों के फूलों  से ढके होते हैं, जिसमें से साग  बनाने के लिए सरसों की हरी पत्तियों का उपयोग किया जाता है। नवंबर से फरवरी के महीनों में सरसों के साग का सेवन आनंद के साथ किया जाता है। साग का रंग बढ़ाने और गाढ़ा करने के लिए इसे पालक  या बथुए  के साथ बनाया जाता है, इसे भारतीय मसालों के साथ पकाया जाता है और इसके ऊपर देसी घी या सफेद मक्खन डाला जाता है।

लोहड़ी  पंजाब के सबसे प्रसिद्ध त्यौहारों में से एक है। यह सर्दी का अंत और रबी  (सर्दी) की फसलें जैसे गेहूँ, जौ, सरसों और मटर की कटाई को चिह्नित करता है। त्यौहार एक उत्सवाग्नि के चारों ओर मनाया जाता है जिसमें गुड़-रेवड़ी, मूँगफलियाँ और मकई के लावे का सेवन किया जाता है। लोहड़ी  के दिन गजक (तिल या मूँगफली और गुड़ से बनी मिठाई), सरसों दा साग और मक्की दी रोटी, और तिल चावल  (गुड़ और तिल के साथ बना हुआ चावल) खाने की परंपरा है।